Wednesday, February 10, 2010

यूँही कोई मिल गया था

चलते चलते
यूँही कोई मिल गया था
सरे राह चलते चलते
वहीँ थमके रह गई है
मेरी रात ढलते ढलते जो
कही गई न मुझसे
वो ज़माना कह रहा है
की फ़साना
की फ़साना बन गई है
मेरी बात चलते चलते
यूँही कोई मिल गया था सरे राह चलते चलते
शब्-इ-इ.न्ताजार
आखिर कभी होगी मुक्त असर भी
ये चिराग ये चिराग बुझ रहे हैं
मेरे साथ जलते जलते
ये चिराग बुझ रहे हैं मेरे साथ जलते जलते
यूँही कोई मिल गया था सरे राह चलते चलते

Movie: Pakeezah/U Me Aur Hum
Genre: Hindi
http://www.youtube.com/watch?v=O6Vgtaw6h0E
http://www.youtube.com/watch?v=ubQ9hrKO6XI


1 comment:

krishnareddy said...

nice blog.

http://www.apcmysr.blogspot.com/

Post a Comment